कुण्डलिया छंद
गैया -कुत्ता घूमतइ , जूठन मिले न हाय
कब कोरोना जाय जो, हम सब बोलें बाय !
हम सब बोलें बाय, तनिक फिर दुनिया देखें
रोटी संग लेजें , और कुत्तन को फेंके !
सुमन बहुत दुखयाय, करें का मोदी भैया
भूखे न मर जाएं , सड़क पे कुत्ता- गैया !!
सीमा शिवहरे सुमन