सुदंर कविता ..
विषय .जिन्दगी ..
जिन्दगी तू यूँ सताना छोड़ दें ।
जिन्दगी तू मुस्कराहट के पल छिनना छोड़ दें ।।
जिन्दगी तू रिश्तों में अनबन सजाना छोड़ दें ।
जिन्दगी तू प्रेम में कांटे सजाना छोड़ दें ।।
जिन्दगी तू नशे की राह पे जाना छोड़ दें ।
जिन्दगी तू आतंक ,हैवानियत की राह छोड़ दें ।।
जिन्दगी तू देश हित गद्दारी करना छोड़ दें ।
जिन्दगी तू माँ बाप से मुँह मोड़ना छोड़ दें ।।
जिन्दगी तू अबलाओं को सताना छोड़ दें ।
जिन्दगी तू हर दिल में नफरत सजाना छोड़ दें ।।
जिन्दगी तू धृणा के बीज बोना छोड़ दें ।
जिन्दगी तू मानव से प्रेम करना सीखा दें ।।