‘चिंतित’
“चिंता भविष्य के विचार से नहीं उत्पन्न होती हैं लेकिन भविष्य को अंकुश में रखने की आपकी इच्छा से उत्पन्न होती है आप चाहते हैं कि जो वर्तमान है वहीं भविष्य रहे, शरीर में कभी रोग ना आए, नौकरी में कभी बदली ना हो, हमारा कारोबार अच्छा ही चलता रहे..
यही आकांक्षाओं की वजह से दुखी होते हैं चिंतित होते हैं, सर्दी के बाद गर्मी आने ही वाली है, सुबह के बाद शाम होने ही वाली है, इसलिए आप इस से इतना चिंतित नहीं हैं क्योंकि इस परिवर्तन पर हमारा अंकुश नहीं है, जैसे प्रकृति के इस बदलाव पर हमारा अंकुश नहीं है।इसी प्रकार हमारे जीवन में भी बदलते संयोगों के लिए मन को तैयार रखे जो कुछ भी होगा उसका हिम्मत से सामना करेंगे इस विचार को आत्मसात् कीजिए,
ज़िंदगी इतिहास के जेसी है, इतिहास कभी एक दिशा में नही चलता कभी जगतविजेता नेपोलियन हारता है तो कभी कमजोर नेल्सन जीतता है,
दिवारों के पीछे बसा नगर आपने देखा ही नहीं तो फिर उसकी कल्पना कैसी ?? छोड़ो इस चिंता को स्वस्थ मस्त ओर प्रसन्न रहेने का यही उपाय हैं.. “
-rajanmukundray