जहाँ मैंने प्यार किया
जहाँ मैंने प्यार किया
वहाँ बस जाऊँ,
जहाँ जवानी में दौड़ा
वहाँ बुढ़ापे में बैठ जाऊँ,
जिसे जैसे देखा
उसे वैसे याद कर लूँ,
जिस पेड़ पर चढ़ा
उसकी छाया ले लूँ,
जिन ऊँचाइयों को नापा
उधर दृष्टि बना लूँ,
जिस यात्रा में थका
उसे विश्राम दे दूँ,
जिस देवता को प्रणाम किया
उनको धन्यवाद दे दूँ,
जहाँ मैंने प्यार किया
बस, वहाँ बस जाऊँ।
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* महेश रौतेला