My New Poem....!!!
अक्सर बिराने-सी खामोशी को भी
यहाँ वही जाँबाज़ पंसन्द करते है,
जीदगीं के ख़ामोश-से लंबे-से सफ़र में
जिन्हों ने शोर-ओ-गुल से भी चोटे खाई हो
अक्सर गहरी-पथरीली राहों के काँटों से
भी सिफँ उन्हीं की दोस्ती बनती आई हैं,
चट्टानों से फ़ौलादी हौसले जिनके सीने में
ओर दुश्वारियों को तो ढाने की ठानी हो..
जिसने हर आँधियों की ख़ाक छानी ओर
हर मसले से निपटने की मनमानी की हो
वनाँ आजकल के फट्टु-से मायूस आशिक़
काँटों से तो ठीक फूलों से ही घायल है..!!
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