कविता ..
जीवन में अधिक ,सम्पदा आपत्ति है ।
जीवन में बुरे ,विचारों की उत्पत्ति है ।।
जीवन में काले ,कारनामों से सम्पत्ति है ।
जीवन में लालच ,ही मौत की उत्पत्ति है ।।
जीवन में मानवता ही ,सम्पत्ति है ।
जीवन में पापाचार ,ही कुल नाशनी है ।।
जीवन में सम्पत्ति ,ही अभिमानदायनी है ।
जीवन में शिष्टाचार ही ,सम्मानदायिनी है ।।
जीवन में दंभ ,कपट ,ही कष्टदायिनी है ।
जीवन में संतोष ही ,लाभकारिणी है ।।
जीवन में सत्य ही ,विश्वासदायिणी है ।
जीवन में झुठ ही ,सर्वनाशिणी है ।।
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