ना जाने क्यों, होता है यह ज़िंदगी के साथ
अचानक ये मन
किसी के जाने के बाद
करे फिर उसकि याद
छोटी-छोटी सी बात, ना जाने क्यों
जो अंजान पल
ढल गये कल, आज वो
रंग बदल बदल, मन को मचल-मचल
रहें हैं छल ना जाने क्यों, वो अंजान पल
सजे बिना मेरे नैनो में
टूटे रे हाय रे सपनों के महल
ना जाने क्यों, होता है यह ज़िंदगी के साथ
अचानक ये मन
किसी के जाने के बाद
करे फिर उसकि याद
छोटी-छोटी सी बात, ना जाने क्यों
वोही है डगर
वोही है सफ़र, है नहीं
साथ मेरे मगर, अब मेरा हमसफ़र
इधर-उधर ढूंडे नज़र वोही है डगर
कहा गयी शामे मदभरी
वो मेरे, मेरे वो दिन गये किधर
ना जाने क्यों, होता है यह ज़िंदगी के साथ
अचानक ये मन
किसी के जाने के बाद
करे फिर उसकि याद
छोटी-छोटी सी बात, ना जाने क्यों