मैं भी चुपचाप धीरे धीरे ऐसी दुनिया की तरफ बढ़ता जा रहा हूँ जहाँ मेरे साथ सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी यादें होंगी...
यकीन रखना उन लम्हों के साथ जीते हुए भी मुझे तुमसे कभी कोई शिकायत नहीं होगी...
उस आधी अधूरी ज़िन्दगी के खाली पड़े खांचों को तुम्हारी तस्वीरों से भर दूंगा, उन तस्वीरों से झांकती तुम्हारी वो आखें जिनमे मेरे न जाने कितने हज़ारों जन्मों की ज़िन्दगी छुपाये बैठी हो...
बस ज़िन्दगी की इस बिसात पर अपनी बेबसी का हिसाब मांगता रहूँगा इस दुनिया के मालिक से...
तुमसे यूँ दूर हो जाना मेरी ज़िन्दगी का आखिरी समझौता ही समझना...
~no buddy