My Saluted Poem for The Soldiers...!!!!
पश्चिमी संस्कृति के ढकोसले
में डूबी आँजकी युवा पीढ़ी
यहाँ फूलों 💐 के गुच्छे देकर
इज़हार-ए-प्यार जताते रहे
वहां 44 वीर जान न्योछावर कर
देश को ही क़र्ज़दार कर गए
पुण्य-पाप की सीमा के पार पहुँच
पुण्यतिथि पहली आ गई
घर की विधवाओं-बच्चों से पुँछे
कोई कि क्या हाल है उनके
तिरंगे ने भी मायूसी से पूछा होगा
आज लहराने से ज़्यादा कफ़न में..
रोया तो होगा वो कण कण माटी का
जहाँ 44ने ख़ून अपना बहाया होगा
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