ब्राह्मण शब्द का अर्थ
सोशल मीडिया पर एक खास वर्ग के लिए गाली देने के पर्याय के रूप में 'उपयोगी' शब्द ब्राह्मण एक जाति नहीं एक सामंती विचार है। जिससे ब्राह्मण का मूल अर्थ छिटक-सा गया है । ब्राह्मण का मूल अर्थ हमारी संस्कृति में विद्वता से है और विद्वान कोई भी हो सकता है । जो विद्वान है वह ब्राह्मण हैं । ॠषि वाल्मीकि कर्म से ब्राह्मण थे। गौतम बुद्ध, महावीर गुरुनानक, कबीर, विवेकानंद, दयानंद, रविदास, डाॅ राजेन्द्र प्रसाद, अंबेडकर सनातन समाज के ब्राह्मण है। पर आज़ादी के बाद मूढ़ व स्वार्थी इतिहासकारों ने गलत व्याख्या कर इसकी परिभाषा बदल दी। वैसे कथित समाजवाद एवं स्त्री, दलित और अल्पसंख्यक के नाम पर पनपे कई खटमल सामंती ब्राह्मणवाद के प्रतीक है। कुछ तथाकथित लेखक एवं लेखिकाएं भी सामंती ब्राह्मणवाद के प्रतीक है क्योंकि इन्हें लगता है इन्होंने जो लिख दिया है वहीं सही है। अतः हम इन्हें पतनशील ब्राह्मणवाद के प्रतीक मान सकते है।