My New Poem....!!!!
या रब तेरी रौशनी में नहाने लगे हैं
लफ़्ज़ हमारे अब जगमगाने लगे हैं
मलक़ से फ़लक तक जाने लगे है
लहजे से तार दिल के बजने लगे हैं
हर-सूँ चार-सूँ सदा अब देने लगे हैं
परवाज़ोंकी बुलंदियाँ भी छूने लगे हैं
हर दिलको अज़ीज़ अब लगने लगे हैं
मायनोंसे अपनी सही पहचान देने लगे हैं
रफ़्ता-रफ़्ता राफ़ता रब से करने लगे हैं
प्रभु की बात हर कलाममें कहने लगे हैं
✍️🌲🌺🌹🌴🙏🌴🌹🌺🌲✍️