✍️.......
वफ़ा तबस्सुम से तुझे अगर होती,
दिल के दहक की भी खबर होती।
जलते तारों की गिनती करने वाले,
बुझते चिरागों की भी फ़िकर होती।
सूखे दरख़्त पे तुझे तरस न आयी,
कितने परिन्दों की जिंदगी बसर होती।
रंगीन रातों की जिद ने जुदा किया तुझे,
दुवाओं से शुरू तेरी हर सहर होती।
तुझे बनाने में न फ़ना करते खुद को,
झुके कन्धों की भी जवां उमर होती।
गर करते दिल से खुदा पर यकीन,
बुढ़ी नजरों पे भी तेरी नजर होती।