कितना खुदगर्ज है इंसान ।जब तक जॉम होता है इस देह में,
हर कोई अपना काम करवा जाता है ।
पर जब यह देह मै से जोम चला जाता है तो ,
एक निर्जीव वस्तु की तरह आपको देखते हैं ।
इससे तो अच्छा कुदरत है जो अपने हर एक चीज से लगाव रखता है। जैसे पेड़ ,पौधे ,पंखी सब अपने हिसाब से ही तो जीते हैं ।
पर हम मनुष्य दूसरों के हिसाब से, सच में कितना खुदगर्ज है इंसान.....
- बिंदु अनुराग ३१/०१/२०