Hindi Quote in Story by Rajesh Maheshwari

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जीवटता

राजीव को बचपन से ही हाकी खेलने का बहुत शौक था। वह बड़ा होने पर इसका इतना अच्छा खिलाड़ी हो गया था कि उसका प्रादेशिक स्तर पर चयन हो गया। वह जब मैदान में हाकी खेलता था तो ऐसा प्रतीत होता था जैसे गेंद उसके कहने पर चल रही हो। उसके टीम में रहने से ही उस टीम के विजेता होने के आसार बढ़ जाते थे। एक बार मैदान में मैच खेलने के दौरान दूसरे खिलाड़ी की गलती से पैर फँस जाने से राजीव गिर गया और उसकी पैर की हड्डी टूट गयी जिस कारण उसे तीन माह प्लास्टर बंधा होने के कारण वह हाकी खेलने से वंचित रहा। चिकित्सकों ने उसके वापस हाकी खेलने पर संशय जाहिर किया था। उसने ठीक होने के उपरांत छः माह तक व्यायाम एवं मालिश के द्वारा अपने पैरों को मजबूत कर लिया और अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण वापिस धीरे धीरे हाकी खेल कर एक दिन पुनः पुराने मुकाम पर पहुच गया।
एक दिन वह मैच खेलकर अपने घर जा रहा था तभी दुर्भाग्यवश एक ट्रक ने उसे टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उसका छः माह तक इलाज चला और डाक्टरों ने उसे अब हाकी खेलने से मना कर दिया। वह कहता था कि हाकी मेरा जीवन है और मैं वापिस एक दिन खेलकर बताऊँगा। वह अस्पताल से छूटने के बाद एक से डेढ़ साल तक धीरे धीरे खेलने का अभ्यास करता रहा और एक दिन वापस मैच में भाग लेने के योग्य हो गया। सभी लोग उसके हाकी के प्रति प्रेम एवं समर्पण की तारीफ करते थे।
उसके सिर से दुर्भाग्य का साया अभी समाप्त नही हुआ था। एक दिन भूकंप आने के कारण उसकी चपेट में एक पाँच वर्षीय बच्ची की जान बचाने के लिये उसका हाथ बिल्डिंग से गिर रहे स्लेब के नीचे आ जाता है। चिकित्सकों को उसकी जान बचाने के लिये उसका हाथ काटना पड़ता है और वह अब हाकी खेलने से वंचित हो जाता है।
वह इससे हतोत्साहित नही होता है और कहता है कि प्रभु हमें जिस हालत में रखे उस हालत में रहकर समझौता करना ही पड़ता है। अस्पताल से आने के बाद वह एक खेल सामग्री की दुकान खोल लेता है एवं खाली समय में बच्चों को सहायकों के माध्यम से हाकी का प्रशिक्षण देना शुरू कर देता है।

Hindi Story by Rajesh Maheshwari : 111332955
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