जिस दिन बदलते हैं बातों का सिलसिला
उस दिन कोई भी कसुर हमारा नहीं होता
यूं ही मेरे खुशियों मे जाते हैं लोग अक्सर
वरना मैं भी कभी अपनी लैंग्वेज बिगाड़ा नहीं होता
वह दर्द जिसे सब ने दिया मुझे उस दर्द को मैंने किसी को सुना नहीं होता
क्योंकि मेरी खुशियां अक्सर सभी को गवारा नहीं होता