दूसरी माँ
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माँ तो माँ होती है,
पहली और दूसरी में,
इसकी गिनती कब होती हैं
दया, करुणा, चिंता
और ममता जिसमे हो,
सही में वही माता होती ।
माँ की परिभाषा,
कहाँ कोई दे पाया,
दर्द में माँ का नाम ही पहले आया
बिन बोले सब समझे,
माता ऎसी ही होती,
माँ की तुलना कभी किसी से नहीं होती
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित