सभी दोस्तों मित्रों साथियों को एवं समस्त देशवासियों को
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई....
एक देशभक्त के लिए बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार पूरा देश करता है.. वंदे मातरम.. भारत माता की जय..
कुछ बातें नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विषय में करते हैं.. ब्रह्मदत्त
जय हिन्द का राष्ट्रीय नारा देने वाले सुभाष चंद्र बोस बहुत अच्छे वक्ता माने जाते थे।
उनके कई संदेशों ने युवाओं को जोश से भरा है। जानिए कुछ प्रसिद्ध संदेश और नारे जो दिये हैं सुभाष चंद्र बोस ने।भारतीय इतिहास में सुभाष चन्द्र बोस का नाम एक महान व्यक्ति और बहादुर स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर याद किया जाता है।
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Happy Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2020
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 123वीं जयंती आज पूरे देश में मनाई जा रही है । उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। उनके पिता जानकी नाथ बोस एक सफल बैरिस्टर थे और माँ प्रभावती देवी एक गृहिणी थीं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से नेताजी की मुलाकात 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान हुई थी। तभी नेताजी ने बापू को राष्ट्रपिता का दर्जा दिया था
और पूरा देश गांधी को राष्ट्रपिता कहने लगा।
ब्यूरोक्रेट की बड़ी सरकारी नौकरी छोड़ कर सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था।
🇮🇳‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’🇮🇳
नेताजी के इस नारे ने पूरे देश में ऐसी क्रांति फैला दी थी कि अंग्रेजों की नींद हराम हो गई थी। आइए उनकी जयंती पर उनके ऐसे ही जोश से भरे कोट्स और नारे याद करें और दोस्तों से उस महागाथा की चर्चा करें…
-.”मुझे यह नहीं मालूम कि स्वतंत्रता के इस युद्ध में हम में से कौन -कौन जीवित बचेंगे, परंतु मैं यह जानता हूं कि अंत में विजय हमारी ही होगी।”
-.”आज हमारे अंदर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके; एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके।”
-.”राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्श सत्य, शिव और सुन्दर से प्रेरित है।”
-.”ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिलेगी, हमारे अंदर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।”
-.”जीवन में प्रगति का आशय यह है कि शंका संदेह उठते रहें और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे।”
-.”हमारी राह भले ही भयानक और पथरीली हो, हमारी यात्रा चाहे कितनी भी कष्टदायक हो, फिर भी हमें
-.”एक सच्चे सैनिक को सैन्य प्रशिक्षण और आध्यात्मिक प्रशिक्षण दोनों की ज़रुरत होती है।”
-.”अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना सबसे बड़ा अपराध है।”
-.”अपने पूरे जीवन में मैंने कभी खुशामद नहीं की है। दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता।”
लेख के अंत में सभी मेरी हिंदुस्तानियों से प्रार्थना है देश भक्त सुभाष चन्द्र बोस जी को श्रृद्धांजलि दें और सच्चे मन और आत्माओं से आवाज में कहें
जय भारत माता की... वंदे मातरम... जय हिंद जय भारत...
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़