बंजर जमीन
दिल हमारा था बंजर जमीन जैसा;
जैसे होता है रेगिस्तान, बिलकुल वैसा ।
आप लाए उसने फुलों से भरी बहार;
मानो, दुल्हन को लाते है जैसे डोली में कहार
जब खिलने लगी उसमें नन्ही नन्ही कलिया;
तब छोड़ के चले गए आप यह गलियां ।
बागबान के बगैर बन गया बगीचा फिर से बंजर
नन्हे नाज़ुक दिल पे चलाया नियतिने खंजर
अब कभी नहीं खिलेगी यहां कलिया
सुनी सदा रहेगी दिल की यह गलियां
बन गई हरी भरी वादी फिर से बंजर जमीन
छटपताएंगी यहां बिना जल के, प्यासी यह मीन ।
Armin Dutia Motashaw