कुछ तो हमारी ही दुआओं का असर है,
वरना वो,पूरी तरह से बेखबर है
शुक्रिया की देखा उसने नज़र भर कर,
वरना कहाँ वो खुदा से कमतर है,
देख कर हमें अकेला इस ज़मीन पर,
उतर आया वो भी पास मेरे,
बख्शा जिसे इस जहां में रब ने,
आसमां छूने का हुनर है,
बड़ कर यकायक जब उसने मुझे गले लगाया,
दुआ के लिए मैंने भी हाथ उठा कर कहा,
यकीन है ऐ मेरे खुद तुझपर,
तू हाँ तू,यहीं कहीं इधर उधर है,
उसकी एक छुअन भर गयी है ज़िन्दगी,
मेरी मुस्कराहट उसी का असर है,
सब पूछने लगे हैं आजकल हमसे,
अकेले हंसते हो,
तुम्हारा ध्यान किधर है....
कुछ तो हमारी दुआओं में असर है,
वरना वो तो पूरी तरह बेखबर है....