https://youtu.be/nQsdUowwF8A
मै तो चली शाम की गली मुझे कोई रोके ना
रोके ना कोई टोके ना
मै तो चली शाम की गली मुझे कोई रोके ना
पायल का ताल बजाती कुछ धीरे धीरे गाती
ब्रिजरज को शीश चढ़ाती
मै तो जोगन बनके चली
मुझे कोई रोके ना
मै तो चली शाम की गली मुझे कोई रोके ना
रूपअनुप निहार लिया सावरे रंग में रंग ही लिया
मनमोहन मित बना ही लिया ....
मै तो सावरे रंग में रंगी
मुझे कोई रोके ना
मै तो चली शाम की गली मुझे कोई रोके ना
चाह बढ़ी उत्साह बनी , अलबेले की राह बनी
मेंरी बिगड़ी बात बनी ...
मै तो प्रीत की बेल से बंधी
मुझे कोई रोके ना
मै तो चली शाम की गली मुझे कोई रोके ना
रोके ना कोई टोके ना
मै तो चली शाम की गली मुझे कोई रोके ना...