सब पाक है तो सब नापाक है
छोड़ दे मन के मोह वही तेरा तुजसे तलाक है
बस जो चाहिए वोह मिल जाये यही तेरा ख्वाब है
मिलेगा अगणित मन से मोह छोड़ यही जवाब है
भूल गया क्या? देह छोड़कर तो तू भी एक राख है
क्या पाक क्या नापाक इसमे पड़ा तो सब खतरनाक है
छोड़ दे मन के मोह वही तेरा तुजसे तलाक है