भारत माता का दुख
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आओ तुमको एक बूढ़ी मां की कथा सुनाते हैं,
उनके के मन के दर्द की तुमको व्यथा सुनाते हैं,
लंगडाते कदमों से वृद्धा पहुंची जब क्लीनिक,
बोले डॉक्टर क्या पांव में कुछ हैं .. तकलीफ,
बोली वृद्धा तकलीफ पांव की 65 में शुरू हुई ,
जब पाकिस्तान ने भारत से लड़ाई करी थी,
ये तो दर्द अब हो गया बस.. आता - जाता,
इस दर्द पर मेरा अब इतना ध्यान नही जाता
तब पूछे डॉक्टर तो क्या गुटने है दुखते,
वृद्धा बोली ये दर्द 70 से ही शुरू हुआ था ,
गुटने के दर्द की भी अब कोई परवाह नहीं ,
यह भी इतना मुझको अब सताता नहीं,
तो बोलो माता कौन सी तकलीफ सताती हैं,
जिसके कारण..... माता तू.... लंगडाती है,
पीट हैं दुखती, सर चक्कराता, देख कर ये सब,
मेरा दिल घबराता, सुरक्षित नही घर की बाला,
बच्ची हो, या हो युवा, कोई भी नार सुरक्षित कहाँ,
इसका कोई इलाज हो तो मुझको तुम बतलाना।
सुन बात वृद्धा की डॉक्टर कुछ समझ न पाया,
वृद्धा के किसी दर्द जा इलाज करना उसे आया,
तन पर तिरंगा लपेटी वो महिला थी भारत माता,
जिस के दर्द का इलाज नहीं कोई भी कर पाता।
सुना कर करूं गाथा आज आंँख मेरी भी रोई,
इसका कोई इलाज हो तो हमें.. बता दो भाई
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित