सरदार
किसान का पुत्र था , शान से जीता था
साधारण सा जन्म था , असाधारण उसका कर्म था
गुलामी ना सेहता था , आज़ादी के लिए लड़ता था
काँटों से भरे इस रास्ते पर , नंगे पैर चलता था
किसानो की लड़ाई लड़ते लड़ते ,
मजदूरों का भी नायक बना
खेड़ा का वल्लभ पता नहीं ,
बोरसद में कब सरदार बना
कड़वी बात बोलता था , कड़वी सच्चाई बताता था
कड़वे घुट पी लेता था , मीठे फल दे जाता था
गाँधी का साथ दिया , हर समस्या का समाधान किया
निडरता का मंत्र दिया , देश को स्वतंत्र किया
कोमी ज़हर फैलाने वालो को , ज़हर देकर सुलाया था
हिन्दू मुस्लिम दंगो को , शांत कर दिखाया था
आस्था की नीव रखी थी ,
सोमनाथ की ईंट रखी थी
धर्म के खातिर संकल्प दोहराया ,
सोमनाथ का पुनर्निर्माण करवाया
दूरंदेशी सोच थी तेरी , वास्तविक्ता तेरा होश
सफलता का ऐसा जोश , तेरा हर कदम बाहोश
हिंदुस्तान को नक्शा दिया , बुलंद भारत का नारा दिया
इस अखंड शिल्पीकार ने , एक नए राष्ट्र का निर्माण किया
कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी, गुजरात Mob.-9723989893