My Heartfelt Poem...!!!
उलटी पड़ी है रेत पर,सब कश्तियाँ मेरी
दिलसे समंदर निकाल के ले गया कोई
जिस्म तो मिट्टीके आज भी आदम के है
“रुँह”पर जिस्मोंसे निकाल के ले गया कोई
भीड़ तो सिफँ आदमियों की बची है आज
अज़मत इन्सानियतकी निकाल ले गया कोई
हवा हैवानियतों की बनी हैं अजीब दास्तान
हवसखौर दिलोंसे रहम निकाल ले गया कोई
मासूम फ़ुल-सी बच्चीयाँ बनी आज खिलौना
खेल घिनौना खेल लाशें छोड़ गया कोई..?
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