मै तो यूहीं बैठी थी समंदर के पास फ़ासला बढ़ गया
और देखते देखते ज़िन्दगी गुजर गई।।।
ज़िन्दगी तेरी हर बात में शामिल हम हुए है
फिर भी ये क्या हुआ ज़िन्दगी गुज़र गई
ज़िन्दगी तेरे हर क़दम पे हाज़िर हम हुए है
जाने क्या बात बनी ज़िन्दगी गुज़र गई
ज़िन्दगी तेरी शान ओ शौक़त पे फ़िदा हम हुए है
रूह पे मेरी मुक़म्मल हुआ क्या ज़िन्दगी गुज़र गई
शायर - कृपा ठक्कर
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