My New Poem ....!!!
मंदिर जाओ गुरुद्वारा जाओ
गिरजाघर जाओ मस्जिद
जाओ या सनमखाना
प्रभु नज़र हमें देखती है हर-वक़्त
गर यह अहसास नहीं व्यवहार में
तो बेकार सजदों में सर झुकाना
मरीज़-ए-मोहब्बत का है इतना
ही फ़साना तड़पना आहेँ भरना
घुट घुट के एक दीन मर जाना
पर प्रभुजी आपके इश्क के
बीमारों का तो बस एक ही
है शिफाखाना है मयखाना
यार के कूँचे में बे-तहाशा
बे-सबब बे-मतलब बे-ख़्याली में
बे-वक़्त चक्कर लगाना
दुनिया से बे-ख़बर पर रब-से
बाँ-ख़बर इश्क़ के बीमारों का
प्रभु-परस्ती में ही जीएँ जाना
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