मेरा वो पेहला प्यार
ना जाने क्यों मुझे बार बार याद आ जाता है
मेरा वो पहला प्यार,
उसकी पहली जलक, जिस्म की वो महक
शराबी आँखे और सरबती बदन
वो बालो की लट और चालो का वट
वो बारिस का मौसम
और मेरी पहली मुलाकात ,
ठहर गया समय और पिगलती रही रात
जलता रहा जिस्म और जलाती रही आग
पूनम के चाँद सी बाते ,वो हसीं मुलाकाते
इश्क़ का वो जूनून , मेरी उम्र को देता सुकून
वो प्यार का दरिया, मेरी तालाब सी प्यास
वो सावन का महीना और मेरी अधूरी प्यास
सतरंगी दुनिया और हज़ारो ख्वाब ,
एक दिन ढह गया महल और जमीन साफसाफ
पहले प्यार की आखरी मुलाकात
उसकी आँखों से निकलता दर्द,
जैसे उफान में दरिया और गहराई में डूबती नैया
धड़कन की तेज चीत्कार और शून्य का आविष्कार
छूट गया सब पीछे , सिर्फ यादे साथ साथ
में बढ़ गया आगे और वो ना मेरे आसपास
कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी ,गुजरात
Mob.-9723989893