आज एक नयी सुबह आयी है ..
अंधेरे से लड़कर रोशनी आयी है ..
कल रात को थक कर हारा था तू ...
देख सूरज बनकर तेरी जीत आयी है ...
वक़्त नई ठहरता यहाँ किसी के लिए भी ..
ख़ुद सूरज भी अपने वक़्त पर आया है ...
तू भी चल ...ज़रूरत पड़े तो दौड़ लगा ..
आज एक नयी सुबह आयी है .....
“शुभ प्रभात “
-A A राजपूत ‘अक्श’