खुशियां हर मोड पे दस्तक देती है ..
जरा रुक -ए ज़िन्दगी खुशियों का जश्न बाकी है..
खुशियां हर मोड पे...
दाखिल हम हुए है दामन ए खुशियों में
आहिस्ताचल , ए ज़िन्दगी खुशियां काफी बाकी है..
खुशियां हर मोड पे...
खुशियों से लिपटने का आगाज़ हमें है करना
रंज-ओ-गम से लेना क्या ,खुशियो से मिलना बाकी है...
खुशियां हर मोड पे...
खुशियों का रूप रंग है हसना और हसाना...
हर मोड.. पर हमें आलम बसाना बाकी है...
खुशियां हर मोड पे दस्तक देती है ..
जरा रुक ए ज़िन्दगी खुशियों का जश्न बाकी है..
खुशियां हर मोड पे दस्तक देती है ..
शायर - कृपा ठक्कर
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