कल साल नया आया था,
फिर साल नया आएगा।
आदाद बदल जाएंगे,
क्या वक़्त भी बदल जायेगा?
क्या ज़िन्दगी का पहिया,
कुछ धीमा पड़ जायेगा?
क्या साल नया तुम्हारी,
किस्मत से लड़ जाएगा?
हर वक़्त गुज़र जाता है,
ये पल भी गुज़र जाएगा।
तुम अब भी अगर ग़ाफ़िल हो,
कुछ हाथ न फिर आएगा।
आज पीछे छूट गया जो,
वो साथ न फिर आएगा।
कल साल नया आया था,
फिर साल नया आएगा।
सुहैल दहलवी