My New Poem ....!!!!
हादसे भी उन्हीं से गले मिलते है
जो वसवसों के शिकार होते है
वनाँ यक़ीन की पाक़िझगी में
जो प्ले बड़े होते हैं होंसले तो
बे-शक उनके बुलंद होते ही है
और मंज़िल से भी जूड़े रहते है
हर मौड़ पे दट़के अंडे रेहते है
ना ख़ौफ़ राह की मुश्किलों से
ना परवाह दुश्वारीऔ की वही
जाँबाज़ सिंकदर भी केहलाते है
प्रभु से भी राफ़ता क़ायम रखते है
जीदगीं सही मायनों में वही जीते है
Positivity की भी पेहचान देते है
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