उसे शिकायतें है मुझसे के मैं शिकायत बहुत करता हूँ,
पगली समझती ही नहीं मैं उससे प्यार बहुत करता हूँ...
वो रूठ गई एक दिन मुझसे...हुई देरी जो मनाने में,
हम उसके हो न सकें....फिर कभी मनाने पे...
जो कहती थी के ता-उम्र साथ निभाना है ....समझे ,
छोड़ गई वो एक दिन ख़ुद ही साथ बिना कहे ...मुझसे ..
काश ए खुदा तू थोड़ा तो मेहरबान होता मुझ पर,
वो आख़री मुलाक़ात थी ..बस एक बार बता देता मुझ को
मैंने कब माँगा था खुदा तुझसे कभी किसी का साथ ,
उस दिन सजदे में तूने ही तो दिखाया था उसको जोड़ें हाथ...
-A A राजपूत “अक्स”