#Happy New Year to dear co-workers and Friends.
#ग़ज़ल -अलविदा कह रहा
जा तुझे आज मैं अलविदा कह रहा ।
212 212 212 212
तेरी मेरी थी जो दास्ताँ कह रहा ।।
जा तुझे आज मैं अलविदा कह रहा ।
दर्द तुमने दिये दर्द हमनें दिये।
तू मेरी मैं तेरी हर ख़ता कह रहा ।।
जा तुझे आज मैं अलविदा कह रहा ।
आ के जाना तो क़ुदरत का दस्तूर है ।
बज़्म को है मगर इब्तिला कह रहा ।।
जा तुझे आज मैं अलविदा कह रहा ।
इश्क़ फूलों ने भँवरों से क्या कर लिया ।
यह जमाना उन्हें बेहया कह रहा ।।
जा तुझे आज मैं अलविदा कह रहा ।
रंजिशें छोड़ने की घड़ी आ गई ।
आज फुरक़त को भी मैं क़ज़ा कह रहा।।
जा तुझे आज मैं अलविदा कह रहा ।
बनके पत्थर सनम जख़्म देता रहा ।
मैं तो पत्थर को भी अब ख़ुदा कह रहा।।
जा तुझे आज मैं अलविदा कह रहा ।
इल्तिज़ा है मगर मुस्कुरा कर के जा ।
मैं तेरी हर ख़ता को अदा कह रहा ।।
जा तुझे आज मैं अलविदा कह रहा ।