My New Poem...!!!
अन-देखे सँतराजने तराशा मुझे
मिट्टीके गाड़ेंसे किया पयदा मुझे
दिखता नही देखता हर घड़ी मुझे
प्रभु अल्लाह ईश्वर ईसु भगवान
अनगिनत नाम-औ-स्वरुप है तेरें
राजा-औ-रँक सबमें दिखे तुं मुझे
सृष्टि रचयिता अजीब तेरी क़ुदरत
दाना एक ले के देता अनेक तुँ मुझे
भूखा उठाता सुलाता भूखा नही मुझे
नदी पर्वत बादल झाड़ पौधेँ फल फ़ुट
कया कया रच तु दिया है आशरा मुझे
जीदगींमें गिराके फिर सँभालता तुं मुझे
मेरी औक़ात है कया मेरा वज़ूद हे कया
रब चाहूँ कया तुजें जितना चाहता मुझे
नव माह माँ के पेटमें देता गिजाँ तुं मुझे
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