जख्म अपने जख्मी को मत दिखाना, क्योंकि वो पहलेसे ही तो हैं जख्मी , तुम्हे जख्मी देख के भी वो खुदका जख्म ही गहरा समजेगा ।
हो अगर जख्मी, अपना दर्द भी बाटना चाहते हो, तो उस शख्श के साथ अपना दर्द बाटलो जो दिल से जख्मी हो लेकिन अब उसके जख्म पायब हो,वो शख्श तुम्हारे दर्द को भी समजेगा ओर तुम्हारे जख्म को भी ,फिर चाहे ये रिश्ता दास्तन -ए -इश्क़ हो या दास्तन -ए- दोस्ती , आखरी मंजिल तक साथ जरूर निभाएगा ।
हेतु_✍