My New Poem...!!!
उनके लगाए हर एक इल्ज़ाम को
बस चुपचाप ही सहे जा रहे हैं हम
और वो हैं कि सरेआम बिलावजह
ही बदनाम ही किए जा रहे हैं हमें
हम ख़ामोश हैं तो वह समझते हैं
कि सही मायनों में गुनेहगार हैं हम
पर वो ये नही समझ रहे कि ख़ामोशी
से उन्हें ही रूसवा होने से बचाते है हम
बात जौ दबी है ख़ामोशी के पिटारे में
गर खुल जाए तो दूध का दूध और पानी
का पानी साबित भी कर सकते है हम
पर फकँ फिर तो उनके हमारे दरमियाँ
क्या रह जाएगा यही सौच चुप है हम।
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