My New Poem...!!!
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आया ही था खयाल;
कि आँखें छलक पड़ीं...!!
आँसू किसी की याद के;
कितने करीब हैं...!!
मौसम-सा बदलता मिज़ाज
नहीं वफ़ा भी अजीब है...!!
फ़िराक़-ए-तन्हाई में दहक़ता
रँज-ए-ग़म भी रक़ीब है..!!
उलफ़त-ए-मुहब्बतकी पाक़िझगी
दम-ब-दम साज़िद है...!!
रब करे ऐसी ही वस्ल-ए-यार
हाँसिल हो कि मँजिल नसीब हो.!!
प्रभुजी फ़िर खुद-ब-खुद याद आए
उनके मेरे दरमियाँ ना कोई दूरी हो..!!
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