सातो ही दिन देते हैं प्रेम का संदेश फिर यह क्रोध और दद्वेष की भावना क्यों.... ब्रह्मदत्त
क्रोध सोमवार को आये तो कहना कि सप्ताह की शुरुआत है आज नहीं करूंगा।।
मंगलवार को आये तो बोलना कि मंगल मेंअमंगल क्यों करु ?
बुधवार को आये तो बोलना बुध तो शुद्ध इसे अशुद्ध क्यों करूं?
गुरुवार को आये तो बोलना आज तो गुरु का दिन है मन में शांति रखनी चाहिए।
शुक्रवार को आये तो कहना शुक्र को तो शुक्रिया अदा करना है भगवान का
शनिवार को आये तो बोलना शनि के दिन घर में शनिश्चर क्यों आये?
और रविवार को आये तो बोलना आज तो छुट्टी का दिन है। खुश रहिए मुस्कुराते रहिए और हां कभी क्रोध न कीजिए...ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़