My New Poem...!!!!
ना तू ख़ुद पहले सा रहा ना मैं वो पहले सी रही..!!
कितना बदल दिया हमने ख़ुद को एक दूसरे के लिए..!!
अब तू तलाशता है मुझमें वो पहली सी मैं..!!
और मैं तलाशती हूँ तुझमे वो पहले
सा तू ..!!
सच में हम दोनों है कितने सिरफिरे ..!!
ए बाँवरा बचपन तुं भी कितना मासुम-सा था ..!!
और में भी एक ज़िंदगी हूँ कितनी साँवरी दिवानी-सी...!!
जब तुं था..!! समजकर भी ना समझ-सी थीं में...!!
अब में हूँ मुक्कमल आँधी-अधूरी-सी पर तुँ नही..!!
वह महान रचयिता भी रचा है अजीब जीवन-क्रम ..!!
जैसे किसी शायरकी किताबके बे-जान पन्ने से ..!!
हम दोनों साथ रह कर भी है तो जुदा जुदा-से..!!
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