My New Poem...!!!
कुछ तो बात है एसे ही तो सर
सजदे में बंदेका नहीं झुकता
कुछ तो बात है एसे ही तो पर
परिंदे का हवामें नहीं फ़रफ़राता
कुछ तो बात है एसे ही तो दर हर
बुजुर्ग का महफ़िल नहीं सजाता
कुछ तो बात है एसे ही तो चार-औ
पहर तज्जली-ए-नुरानी नहीं बरसती
कुछ तो बात है एसे ही तो हर घर
चिराग़ साँझ ढलते ही नहीं जलाते
कुछ तो बात है एसे ही तो तस्ववुर
हर क़ौम उसका दिलमें नहीं बसाते
कुछ तो बात है एसे ही तो मौजें भी
रफ़्तार गुरुब-ए-ऑफताबपे बदलती
कुछ तो बात है एसे ही तो सितारों के
चलन गदीँश-ए-वक़्त पे नहीं ठहरते
कुछ तो बात है एसे ही तो सुर्ख़ बादल
तस्वीर-ए-क़ुदरत में नज़र नहीं आते
एहसासात-ए-कमालात-ए-ख़ालिक़
तेरी रसाई-ए-परवरदिगारी के सदके
क़ुरबान मेरे हर कलाम हर रूबाई..!!i