My New Poem ...!!!
पेड़ से गिरी आम की शाख़
जैसी मिठास भट्ठी में पके
आम में नहीं आ सकती..!!
ठंडी होने के बाद
दोबारा गर्म की गई चाय में
पहली-सी स्वाद आ नहीं सकती
और ...!!!
समाधान किए हुए
रिश्ते में पहले जैसी
मिठास कभी भी आ
नहीं सकती....!!
रिश्ते दोस्ती के हो या
ख़ानदानी बाज़ी हाथ-से छूटे
उससे पहले सँवार लिया करो
कुछ तुम झुक़ ज़ाया करो कुछ...!!
वनाँ बाद में न जाने कितनी
अनकही बातें साथ ले जाएंगे...
झूठ कहते हैं लोग की,
खाली हाथ आये थे
खाली हाथ ही जाएंगे ......!!
प्रभु के दरबार में भी शर्मीदगीं की
सौग़ात साथ ले कर जाएँगे
आन-औ-अहंकार से जीते जी
किन्तु बाज़ कभी ना आएँगे...!!!
🌹💕💜🌹🙏💕🙏😃