बारिशों के सारे फूल समेट कर ले गया सितंबर
अक्टूबर उन जन्मों की स्मृति है
जो मैंने तुम्हारे बिना बिताए
तुम्हारे पास मेरी अनामिका अंगुली का नाखून है
जिसपर ईश्वर का चित्र उकेर प्रदर्शनियों में सजाते आए तुम
मेरे झरे केशों का मांझा बना
तुमने स्वर्ग तक पतंगें उड़ाई हैं..