मै जिंदगी में बहुत जला हूं
मनहूस उदासियों में पाला हूं
मोहब्बत के हर मुकाम पर छला हूं
ईश्वर ने मुझें शायद बनाया ही इसीलिए हैं, एक नजर कोई भी मुझें देख ये नहीं कह सकता कि कोई ना मेरी आवाज़ सुन सकता हैं ना में किसी की
जब sms के इस दौर में उसे जब मिरे अल्फाज़ो के ज़रिये उसे मोहब्बत हुई.... वादे हुए दोस्ती को निभाने के... एक दिन जब उन्हें इस बात का पता चला की मै सही मै बोल और सुन नहीं सकता तो उस दिन से ज़नाब हमें हर जगह से ब्लॉक करके बैठे हैं और हर पोस्ट पर हमें ही कसूर बार बता कर इलज़ाम लगाए जा रहें हैं... जबकि मै कई बार माफ़ी मांग चुका हूं... ईश्वर ने मुझें जिस कमी के साथ इस ज़हां में भेजा हैं तो क्या गलती मेरी हैं...?
अगर किसी के पास इसका जबाब हैं तो बताना शायद सुन सके ये बहरा ज़माना...