ऐ पल जिंदगी के गुलजर है
ना देखे पलखो की गुजारीश है
वो दीन तेरे बिना खुश था
आज तेरे संग ओर भी खुश है
ना सपनों मे बसाया कभी तुझे
फिरभी हकिकत मे समाया
खाइस थी कभी दील को मेरे
तुझे सपनों मे हरपल मीलू
पर लम्हे नींद मे खो गये
वो लम्हे हँसी के थे तुम बिन
मुलाकात से नीगाहोमे खो गये
यादें तेरी ठुठती है महोबत को
जुलफे वही है गुलमहोर मे
सुनी राहै केहती है लबसे
ये मोहबत की छाई है
क्या जुलफे क्या बाते
ये मीलती इश्क की है तनहाई
nicky tarsariya
19/10/2019