दार ओ मदार , हमदर्द तुज पर
वफा थोडी सी इतमीनान हो जाए
रुहानियत का आईना हुं, यकीनन,
नजर ए नजर, नूरानी हाल हो जाए
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कब्र की बस्ती है , जिंदगीयाँ
जीस्मी हाल काअलम फकत,
वोह जिंदा है , बेसब्री में जिंदगी,
फना होना फितरत रुहानी फकत
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