Hindi Quote in Story by Rajesh Maheshwari

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भ्रात प्रेम

एक शहर में रमेश और महेश नाम के दो सगे भाई रहते थे। उनके बीच में संपत्ति के बँटवारे को लेकर मतभेद थे जो कि इतने बढ़ गये थे कि उनमें आपस में बातचीत भी बंद हो गई थी।
एक दिन महेश एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे अस्पताल ले जाया गया। वहाँ पर चिकित्सकों ने उसका तुरंत आपरेशन करने का निर्णय लिया और इसके लिए रक्त की आवश्यकता थी। महेश का ब्लड ग्रुप बहुत ही दुर्लभ था जो कि बहुत तलाश करने पर भी उपलब्ध नही हो पा रहा था। जब इस बात की जानकारी रमेश को लगी तो वह तुरंत भागा भागा अस्पताल आया और अपना खून देने की पेशकश की क्योंकि उसका ब्लड ग्रुप भी महेश के ब्लड ग्रुप से मेल खाता था।
यह जानकर रमेश के पहचान वालों ने उसे समझाना शुरू किया कि तुम रक्तदान मत करो। यह तुम्हारा सगा भाई होते हुए भी तुम्हारे हिस्से की भी संपत्ति हडपने की फिराक में था। ऐसे व्यक्ति से इतनी सहानुभूति क्यों ? वहाँ पर महेश के हितैषियों ने भी उसके परिजनों को कहने लगे कि रमेश भाई होते हुए भी किसी दुश्मन से कम नही है। वह महेश के हिस्से की संपत्ति को भी हड़पना चाहता है। ऐसे व्यक्ति से कोई भी सहयोग लेना उचित नही है।
इतना बोलने के बाद भी रमेश ने अपना खून दिया और महेश ने उसे स्वीकार कर लिया और आपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। अपने भाई को मुसीबत में देखकर उसके प्रति उमडे प्रेम ने दोनो के बीच के संपत्ति के बँटवारे के विवाद को सुलझा दिया और वे पुनः एक हो कर रहने लगे।

Hindi Story by Rajesh Maheshwari : 111268333
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