दर्द अपना ,अहेसास अपना ,
नजरिया ,जहाँ का खयाल अपना
है रंगीनियाँ जिंदगी , अजब सी
गजब ,अनासक्ति ,खयाल सपना
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वोह ,देखता है नूर ए नजर फकत
क्या अच्छा ,क्या बुरा है जिंदगी
बस ,पलकों पर पहेरा है हुश्न का
सरेआम महेबुब का दिदार जिंदगी
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है खेल लफ्ज़ की सकल में रुहाना
मौसम ए महोबत ,जिंदगी सुहाना
हर कदम ,हर साँस में नेक करम ही
ईबादत अपनी ,बस जिंदगी रुहाना
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