इश्क़ की गलियों की रिवायते भी अजीब है उसे खोने का डर है जिसे पा भी नहीं सकते
बस तुझे हा तुझे ही खुदा समझ बैठे है, ये इश्क़ है कितना गहरा ये तुझे बता भी नहीं सकते
इश्क़ की गलियों की.....
सब देख लू बस तेरे अश्क़ देख नहीं सकती
उसका बार बार यही कहना की तुम अपना ख्याल क्यू नहीं रखती
वो कहता है की जान हो तुम मेरी की हम तुम्हे जी भर सता भी नहीं सकते
इश्क़ की गलियों.....
चाँद की तरह रोज़ बढ़ता है तुझसे मेरा प्यार
जानती हू की बढ़ने नहीं देगी इस दिल्लगी को ये दुनिया
शायद भूल गयी की मेरे इश्क़ को वो घटा भी नहीं सकती
इश्क़ की गलियों......
नेहा चंदरदीप ❤