सुदंर कविता ..
आज ये कैसा जमाना आ गया हैं ।
बेसुरे को गीत गाना आ गया हैं ।।
यहाँ कौन दिल से निभाता है दोस्ती ।
दिल ही दिल में दुश्मनी निभाना आ गया ।।
आज गिरे हुए को कौन उठाता हैं ।
पर सभी की नजरों में गिरना आ गया ।।
आज लोग नया हुनर सीख गये हैं ।
पाप के सारे राज छुपाना आ गया ।।
जो कभी दे नही सकते दुसरो को हंसी ।
मगर उनको दूसरो को रुलाना आ गया ।।
माँ बाप को जो समझते है बोझ जो ।
उन्हें सहज ही वृद्वाश्रम में भेजना आ गया ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।