3--कवि की आत्मा
कवि को लम्बी बेरोज़गारी के बाद एक महानगर में उपसंपादकी मिल गयी.खुश होकर कवि महानगर में मकान ढूंढने लगा.बड़ी मुश्किल से एक पुराना मकान मिला.कवि जी सपरिवार शिफ्ट हो गए. मगर रात को ही कवि को लगा मकान में कुछ गड़बड़ है. नहाते समय कवि प्रिया ने भी कहा –कुछ अजीब अजीब आवाजें आती है.कुछ दिन निकले मगर मन में वहम घुस गया.एक बाबा से बात की .बाबा ने ध्यान लगाया और बताया –आपके पहले भी इस मकान में एक कवि थे उनकी आत्मा भटक रही है ,आत्मा की शांति जरूरी है,कवि ने उपाय पूछा ,बाबा बोले –
उनकी काव्य पुस्तक छपवाओ और रॉयल्टी मुझे दिलवाओ.कवि और कवि प्रिया दूसरा मकान ढूंढ रहे हैं.